कैग रिपोर्ट में कुम्भ के लिए आवंटित बजट पर सवाल खड़ा किया - एमएलसी दीपक सिंह

 


वेबवार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा

लखनऊ 24 अगस्त। दीपक सिंह (एम0एल0सी0), नेता कांग्रेस विधान परिषद दल ने आज उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी में मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा किः

१- कुंभ के आयोजन में किया गया ये घोटाला उ0प्र0 के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला है। इतना बड़ा घोटाला सरकार ने हो जाने दिया और इसमें लिप्त भ्रष्टाचारियों को ढाई साल का समय भाजपा सरकार द्वारा दिया गया, यदि सही समय से इसपर सरकार ने कार्य किया होता तो कई मंत्री और अधिकारी इस भ्रष्टाचार के चलते जेल चले गये होते।

२- नेता कांग्रेस विधान परिषद दल दीपक सिंह ने इस ओर उ0प्र0 की भाजपा सरकार का ध्यान आकर्षण सदन में भी किया था परन्तु योगी सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और भ्रष्टाचारियों को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया।

३- नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक की ऑडिट रिपोर्ट ने योगी आदित्यनाथ की बीजेपी सरकार के पारदर्शिता के झूठ को पुनः बेनकाब किया है।

४- सरकार एक तरफ फिजूलखर्ची रोकने और पारदर्शिता के दावे करती रही और दूसरी तरफ जनता के पैसे को भ्रष्टाचार का पलीता लगाया जाता रहा, 2019 में प्रयागराज में आयोजित हुए कुंभ मेले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ, उस समय भी कुम्भ में हुए भ्रष्टाचार पर सवाल उठे लेकिन सरकार ने भ्रष्टाचार को धर्म की आड़ के सहारे ढक दिया गया।

५- लेकिन ऑडिट रिपोर्ट ने सरकार के दावों की पोल खोलकर रख दी, कुंभ मेले के लिए 2743.60 करोड़ रुपए आवंटित हुए जिसमें जमकर भ्रष्टाचार हुआ और पैसे का अपव्यय किया गया।

६- कुंभ मेले में जिन 32 ट्रैक्टर को खरीदा गया उनके रजिस्ट्रेशन नं0 मेल नहीं खाते, वह कार, मोपेड और स्कूटर के नंबर पंजिकृत हैं।

७- कैग रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के अभिलेखों से मेसर्स स्वास्तिक कंस्ट्रक्शन से संबंधित सत्यापन रिपोर्ट में उल्लिखित 32 ट्रैक्टरों की पंजीकरण संख्या के सत्यापन में मिला कि 32 में से चार ट्रैक्टरों के पंजीकरण नंबर एक मोपेड, दो मोटरसाइकिल और एक कार के थे।

८- कैग रिपोर्ट में विभिन्न विभागों से कुम्भ के लिए आवंटित बजट पर सवाल खड़ा किया है, कुंभ मेला अधिकारी ने अन्य विभागों के बजट खर्चे की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जिससे उस बजट के खर्चे का विवरण ही नहीं मिल सका।

९- कुम्भ मेले में आपदा राहत कोष से गृह (पुलिस) विभाग को 65.87 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, कैग ने इस पर बीबी सवाल उठाया है कि आपदा राहत कोष का प्रयोग तो आपदा की स्थितियों में होता है ऐसे में आवंटित धन का अपब्यय हुआ।

१०- कुम्भ में टिन, टेंट, पंडाल, बैरिकेडिंग कार्यों के लिए 105 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष मेला अधिकारी ने 143.13 करोड़ रुपये के कार्य कराए।

११- बिना वित्तीय स्वीकृत च्ॅक् विभाग ने सड़कों के निर्माण भारी अनिमियता हुई, स्वीकृत दरों से कई गुना ज्यादा पर काम कराया गया।

१२- उ0प्र0 की पुलिस द्वारा खरीदे गये 10 ड्रोन कैमरे जिनकी कुल लागत 32.50 लाख थी वे इस्तेमाल में ही नहीं लाये गये। सी0ए0जी0 के अनुसार ये 10 ड्रोन कैमरे किसी काम के नहीं थें। भ्रष्टाचार के कारण समस्त कुंभ में आये हुये श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ एक बड़ा खिलवाड़ किया गया। यदि कोई अप्रिय घटना घटित हो जाती तो कितना बड़ा हादसा होता।

१३- योगी सरकार ने भ्रष्टाचार की समस्त सीमाओं को तब पार कर दिया जब राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के रु0 65.87 करोड़ का इस्तेमाल कुंभ आयोजन में कर लिया और उसका हिसाब भी नहीं दिया जिसपर सी0ए0जी0 ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

१४- योगी सरकार ने रु0 42000 के एक शौचालय का निर्माण किया तथा रु0 231.45 करोड़ के अस्थाई टेंटों का निमार्ण कराने में खर्च किया जिसके विषय में सी0ए0जी0 का कहना है कि इसका कुल भुगतान रु0 143 करोड़ ही होना चाहिए था।

१५- योगी सरकार ने कुंभ के आयोजन में कोई कार्य बिना कमीशन और रिश्वत के नहीं कराया, हद तो तब हो गयी जब रु0 10,500 की एल0ई0डी0 लाईट का भुगतान रु0 22,650 कर दिया और राज्य को इस मद में भी रु0 32 लाख का चूना लगा दिया।