बीआईएस द्वारा दी गई सुविधा एक मृगमरीचिका के अलावा कुछ नहीं- एस के मनीष

 


- 99.5% एवं 99.99% दोनों शुद्धता के आभूषण बनाने की मान्यता देनी चाहिए

वेबवार्ता(न्यूज़ एजेंसी)/अनुराग वर्मा

पटना/जुलाई। बीआईएस द्वारा हॉलमार्क में सख्ती व हुईद लागू करने से विगत माह से ज्वेलरी व्यवसाय में काफी असंतोष व उहापोह की स्थिति बनी हुई है। तमाम व्यवसायी इस हुईद का विरोध अपने अपने स्तर से करना भी शुरू कर दिया है।       

 दिनांक 23 जुलाई 2021 को इंडियन स्टैंडर्ड्स 1417 में सुधार करते हुए बीआईएस ने 24K (99.50%) शुद्धता के आभूषण बनाने की छूट प्रदान की है। भारत का स्वर्ण उपभोक्ता इस खबर से आनंदित हो गया कि अब वह हॉल्मार्क शुद्ध सोने के आभूषण खरीद एवम इस्तेमाल कर सकता है। संयुक्त सर्राफा मोर्चा के लीगल एडवाइजर एस के मनीष ने तर्क सहित बताया कि बीआईएस के द्वारा दी गई यह सुविधा एक मृगमरीचिका के अलावा कुछ नहीं। अपने वक्तव्य के समर्थन में उन्होंने निम्नलिखित तर्क दिए है:-

1- बीआइएस ने हॉल्मार्क 99.50% शुद्धता का आभूषण बनाने के आदेश के साथ एक दूसरा आदेश भी निर्गत किया कि सर्राफा 99.99% शुद्धता के आभूषण बिल्कुल नहीं बना सकता। यह आदेश पहले आदेश को निरस्त करने के बराबर है। एक आभूषण की शुद्धता में कमी न हो, इसके लिए सर्राफा उसकी शुद्धता थोड़ा ऊपर रखता है, अर्थात 99.50% आभूषण की शुद्धता 99.80% रखता है। अब 99.80% की शुद्धता थोड़ी अधिक ऊपर अर्थात 99.99% चली जाएगी तो वह कानूनन अवैध हो जाएगा क्योंकि उस शुद्धता का आभूषण बनाना मना है। 

2- एक हस्तशिल्प स्वर्ण कारीगर इस 99.80% के आभूषण को बनाने एवं 99.99% के आभूषण नहीं बनाने के आदेश के बीच असहाय हो जाएगा एवम आभूषण बनाने से हाँथ खड़े कर देगा। एस के मनीष का कहना था कि हॉल्मार्क शुद्ध सोने अर्थात 24K के आभूषण बनाने का आदेश एक 0.1% शुद्धता को मेंटेन करने के मकड़जाल के अलावा कुछ नहीं। एस के मनीष ने मांग की है कि अगर बीआईएस भारत के स्वर्ण उपभोक्ता को 24K शुद्धता के आभूषण उपलब्ध करना की मंशा रखती है तो उसे 99.5% एवं 99.99%  दोनों शुद्धता के आभूषण बनाने की मान्यता देनी चाहिए। एक देना दूसरा नहीं देना, कुछ भी नहीं देने के बराबर है। भारत के स्वर्ण उपभोक्ता को 24K के सिक्के एवम बुलियन पहले भी उपलब्ध थे और आज भी हैं। परंतु हॉल्मार्क 24K (99.50%) के आभूषण मिलना कल भी दुर्लभ था आज भी दुर्लभ है।