सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी केन्द्र सरकार पर कानून का करारा तमाचा - डाॅ0 मसूद अहमद

 

वेबवार्ता(न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा

लखनऊ 11 जनवरी। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ0 मसूद अहमद ने कहा कि कृषि कानूनों और किसानों के आन्दोलन पर सुनवाई करते हुये सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा केन्द्र सरकार की असफलता जैसी टिप्पणी होना केन्द्र सरकार पर कानून का करारा तमाचा है। भारत के मुख्य न्यायाधीष ने केन्द्र सरकार को फटकार लगाते हुये कहा कि कृषि कानूनों पर रोक आप लगा रहे हैं कि मैं लगाऊँ। साथ ही यह भी कहा कि महात्मा गांधी ने भी सत्याग्रह किया था। अतः किसानों के प्रदर्शन पर हम रोक नहीं लगा सकते। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह टिप्पणी देष के किसानों की ऐतिहासिक विजय है और निश्चित रूप से किसान मसीहा चै0 चरण सिंह की आत्मा ने भी किसानों की विजय पर संतुष्टि महसूस की होगी।

        डाॅ0 अहमद ने कहा कि विगत 46 दिन से लाखों किसान दिल्ली के सभी बार्डरों पर अपना घर परिवार छोड़कर शान्तिपूर्ण ढंग से धरना प्रदर्षन कर रहे हैं और इतनी लम्बी अवधि में लगभग 50 किसान असमय काल के गाल में समा गये और 3 किसानों ने केन्द्र सरकार की हठधर्मिता से क्षुब्ध होकर आत्महत्या भी कर ली। परन्तु केन्द्र सरकार के प्रधानमंत्री अथवा किसी अन्य मंत्री ने शोक व्यक्त करना भी उचित नहीं समझा जोकि मानवता की हत्या और देष के अन्नदाता का अपमान है। उन्होंने कहा कि  सर्वोच्च न्यायालय ने किसानों का दर्द महसूस करते हुये केन्द्र सरकार की आंखे खोलने का प्रयास किया है और किसानों का सम्मान वापस दिलाया।

        रालोद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केन्द्रीय मंत्रियों द्वारा किसानों को आतंकवादी ओर खलिस्तानी जैसे शब्दों से अपमानित करना लोकतांत्रिक सरकार द्वारा देष की जनता का अपमान है जो अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय पर विश्वास करते हुये कहा कि वह सरकार की दमनकारी नीतियों में शामिल कृषि कानूनों पर रोक लगायेगा और नये कृषि कानून बनाने में किसान संगठनों के विचारों को भी शामिल करने का निर्देष केन्द्र सरकार को देने की कृपा करेगा। देष के किसानों को सर्वोच्च न्यायालय में पूर्ण आस्था है।