पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने दीपावली पर पेश की मिशाल, तोहफों के बजाये ड्यूटी को प्राथमिकता दी

 


- अर्थवादी और भ्रष्टाचारी युग में ऐसे नेक और जिंदादिल पुलिस अधिकारी की होनी चाहिए भूरि-भूरि प्रसंशा
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा
 लखनऊ 15 नवंबर। दीपावली के शुभ अवसर पर प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य अपनी कार्यशैली को लेकर हमेश से सुर्ख़ियों में रहते है। आज के अर्थवादी और भ्रष्टाचारी युग में ऐसे भी अधिकारी है, जिन्हे देख कर उनकी ईमानदारी की भूरि-भूरि प्रसंशा होनी चाहिए। 
    दीपावली का त्यौहार आम जनमानस के लिए पटाखों का त्यौहार माना जाता है, लेकिन वही समाज के उच्च वर्ग और अधिकारीयों में अपने उच्चाधिकारियों में तोहफों को देने की परंपरा त्यौहार का एक हिस्सा हो गया है। लेकिन प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने दीपावली पर एक शानदार मिशाल पेश किया और अपने अधीनस्थों से एक अदद गिफ्ट तक नहीं लिया। 
      ज्ञात हो की इसके पहले कोरोना संक्रमण काल की शुरुआत के साथ होली पड़ी थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ के दरबार में सभी तरह के गिफ्टों की भरमार थी। परन्तु कल दीपावली के शुभ अवसर पर अधीक्षक अनुराग आर्य ने अधीनस्थों को अपने-अपने क्षेत्र में अपने कर्तब्यों के प्रति वफादारी से तटस्थता के साथ निर्वहन करने की विशेष हिदायत दिया। साथ ही सख्त निर्देश दिया गया था कि थानेदार/इंचार्ज आवश्यकता हो तभी मुख्यालय पर नजर आएं। जनता दीपोत्सव को मनाए और पुलिस अपनी ड्यूटी मुश्तैदी से करे। क्षेत्राधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक अपने क्षेत्र में पेट्रोलिंग करते रहें। पुलिस अधीक्षक के इस फैसले की चर्चा खाकी से होते हुए प्रबुद्ध वर्ग के साथ-साथ जनमानस में भी हो रही है।