राज्य संग्रहालय के निदेशक ने किया कला अभिरूचि पाठ्यक्रम का उद्घाटन

- संग्रहालय ज्ञान का वातायन, गौरवमयी अतीत का संरक्षक एवं भविष्य का शिक्षक है-डाॅ0 आनन्द कुमार सिंह



वेबवार्ता/अजय कुमार वर्मा 
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संग्रहालय के निदेशक डाॅ0 आनन्द कुमार सिंह ने बताया कि कला अभिरूचि पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न नागरिकों को अपनी भारतीय कला एवं संस्कृति से परिचित कराना होता है। आज के आधुनिक युग में व्यक्ति इंटरनेट के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने में अधिक रूचि दिखाते हैं किन्तु यदि हम अपनी संस्कृति की वास्तविकता को मूलरूप से देखने एवं समझने का प्रयास नही करेंगे तो हमारा ज्ञान अपूर्ण है।
     डाॅ0 आनन्द कुमार सिंह ने आज राज्य संग्रहालय लखनऊ की शैक्षिक प्रसार योजना के अन्तर्गत ‘कला अभिरूचि पाठ्यक्रम’ का शुभारम्भ संग्रहालय सभागार में किया। निदेशक ने बताया कि संग्रहालय ज्ञान का वातायन, गौरवमयी अतीत का संरक्षक एवं भविष्य का शिक्षक है। निदेशक द्वारा बताया गया कि समय-समय पर संग्रहालय द्वारा इस प्रकार के शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
     मुख्य वक्ता के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो0 शैलेन्द्र नाथ कपूर ने ‘‘भारतीय कला का मर्म’’ विषय पर बताया कि कला हमारा जीवन्त अतीत है। मानव जीवन में तीन सम्बंधों मनुष्य का प्रकृति से सम्बंध, मनुष्य का मनुष्य एवं अन्य जीवों से सम्बंध तथा मनुष्य का अतीन्द्रिय सत्ता के साथ आस्था का सम्बंध का सर्वाधिक उपयोग है।
      इस अवसर पर प्रो0 शैलेन्द्र नाथ कपूर, श्यामानन्द उपाध्याय, चन्द्रभाल मिश्रा, पूर्व अधीक्षणविद् भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, इन्दु प्रकाश पाण्डेय, डाॅ0 संगीता शुक्ला, विभागाध्यक्ष, नवयुग कन्या महाविद्यालय, राजीव त्रिवेदी, डाॅ0 राम विनय के अतिरिक्त उ0प्र0 संग्रहालय निदेशालय, उ0प्र0 राज्य पुरातत्व निदेशालय, राज्य संग्रहालय एवं लोक कला संग्रहालय के कर्मियों के साथ-साथ विभिन्न विद्यार्थियों एवं संभ्रान्त नागरिक उपस्थित रहे।- अशोक कुमार