प्रमिलादेवी मेमोरियल फाउंडेशन ने सुभाष जयंती पर समरसता भोज का आयोजन किया

वेबवार्ता/अजय कुमार वर्मा
वाराणसी। प्रमिलादेवी मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से आज बाबतपुर के वासदेवपुर गांव में सुभाषचंद्र बोस जयंती के अवसर पर ग्रामीण बहनो, भाई-बंधुओ, बच्चो संग समरसता भोज का आयोजन किया गया। साथ ही फाउंडेशन की ओर से पुराने वस्त्र, घरेलू सामान, कंबल, मोजे, साड़ियां, शर्ट, पैंट, चादर, बर्तन इत्यादि का वितरण गांव वालों के बीच किया गया। साथ ही फाउंडेशन की महानगर महिला संयोजक श्रीमती प्रीति जायसवाल का जन्मदिन भी मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि काशी के वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र गुप्त रहे।



फाउंडेशन की फाउंडर व अध्यक्ष पायल सोनी ने बताया कि "आज सुभाष चंद्र बोस की जयंती है उन्होंने सशस्त्र बल की स्थापना की थी। जिसका नाम "आजाद हिंद फौज" रखा गया था। उनके 'तुम मुझे खून दो,मैं तुम्हें आजादी दूंगा' के नारे से भारतीयों के दिलों में देशभक्ति की भावना और बलवान होती थी। आज भी उनका यह नारा प्रासंगिक है और इस नारे से हम सभी को प्रेरणा मिलती है। आज सहभोज का उद्देश्य केवल इतना था कि जिसप्रकार नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने समाज व देश मे सामाजिक समरसता को कायम रखते हुए देश के लिए कार्य किया और सबको साथ लेकर चले थे। उसी प्रकार हम और हमारे आज के युवा उनके पथ-चिन्हों पर चल कर समाज और देश को एक सूत्र में पिरो कर चले जिससे राष्ट्र में मजबूती कायम होगी। साथ ही पुराने वस्त्रों और सामानों का वितरण इसलिए कराया गया है क्योंकि फाउंडेशन यह समझती है कि बहुत सारी चीजें हमारे घर में फालतू की पड़ी होती हैं जिनका हमें कोई उपयोग नहीं होता और जो कभी कबाड़ में बेच दी जाती है चंद रुपयों के लिए।इसलिए हम सभी लोगों से यह कहते हैं कि कृपया आप वह सामान रद्दी में मत बेचिए। हो सकता है उसकी जरूरत किसी और को भी हो सकती हैं तो इस वजह से फाउंडेशन के सभी पदाधिकारी सभी आस-पास के लोगों से संपर्क करते है सामान को एकत्रित करवाते हैं और उसको किसी भी गांव में जाकर ग्रामीणों में वितरित करवाते हैं।ताकि यह सामान उनके दैनिक जीवन में उपयोगी सिद्ध हो सके। आज हमारे महानगर महिला समन्वय प्रीति जायसवाल जी का जन्मदिन भी है, इसलिए भी हम लोगों ने यहां पर बच्चों,महिलाओं,पुरुषों के बीच में मिठाइयों का वितरण कराया है।



      आज के आयोजन में फाउंडेशन के सभी पदाधिकारियों की उपस्थिति रही जिसमें शशि प्रभा पांडे, रचना श्रीवास्तव, गीता जायसवाल, उर्मिला जायसवाल, नीतू, जायसवाल, देवर्षी, काव्या, वेदिश, तान्या, सरिता, पूनम, प्रभावती, चंदा, लक्ष्मी, नारायणी, शोभा, अंकित, राजेश, चंद्रकला, सुनीता, सोमवती इत्यादि ग्रामीण लोगों की उपस्थिति रही।