जनता की आवाज को दबाने के लिए सत्ता का दुरूपयोग अलोकतांत्रिक और अवांछनीय कृत्य - अखिलेश यादव 


वेबवार्ता/अजय कुमार वर्मा 
लखनऊ। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा विरोधाभासों में अपनी सरकार के दिन काट रही है। उसके पास विकास की या भविष्य की कोई दृष्टि नहीं है। महामहिम राज्यपाल महोदया को प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति सुधरी नज़र आती है। किन्तु हकीकत में ‘उनकी सरकार‘ बिना 144 धारा के सहारे एक कदम नहीं चल पा रही है। यह सब तब हो रहा है जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय इस पर टिप्पणियां कर चुका है। भाजपा सरकार सम्भवतः अपने को इस सबसे ऊपर मानती है।
    सर्वोच्च न्यायालय ने अभी पिछले दिनों ही यह टिप्पणी की थी कि अनावश्यक तौर पर धारा 144 लागू करना नागरिक स्वतंत्रता पर प्रहार करना है। विरोधी सुरों को बेमियादी समय तक दबाने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता है। इसकी व्यवस्था हिंसा और सार्वजनिक सुरक्षा पर खतरे की आशंका में ही किसी क्षेत्र विशेष में होनी चाहिए। लेकिन उत्तर प्रदेश की सरकार है कि वह लगातार धारा 144 लागू कर नागरिक स्वतंत्रता का हनन करने पर तुली है। यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय और संविधान दोनों की उपेक्षा है।
      भाजपा सरकार ने राज्य में ऐसी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की है कि राजधानी में ही पुराने लखनऊ के घण्टाघर पर सीएए और एनपीआर के विरोध में सैकड़ों महिलाओं द्वारा धरना-प्रदर्शन के समय कंपकंपाती ठण्डी रात्रि में उनके कम्बल छीन लिए गए। शौचालय पर ताला लगा दिया गया। प्रदर्शन स्थल की लाइटें काट दी गई। महिलाओं के साथ बच्चे भी थे उन पर भी इस सरकार को तरस नहीं आया। यह सरकार की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। अब सब भाजपा से जल्दी मुक्ति के इंतजार में है।