यू0पी0 सरकार किसानों का उत्पीड़न कर रही - आराधना मिश्रा ‘‘मोना’’

वेबवार्ता(न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा
लखनऊ 12 दिसम्बर। श्रीमती आराधना मिश्रा ''मोना'', नेता, कांग्रेस विधान मण्डल दल, उ.प्र. ने कहा है कि भारतीय जनतापार्टी की सरकार जब से सत्ता में आयी है तब से किसानों का उत्पीड़न बढ़ता ही जा रहा है, जिस मानसिकता से अंगे्रजों ने देष के किसानों का शोषण किया था उसी तरह का व्यवहार भारतीय जनतापार्टी भी किसानों के साथ कर रही है ।
नेता, कांगे्रस विधान मण्डल दल ने कहा है कि अपनी मांगों को लेकर प्रदेष में गन्ना किसान आन्दोलित हैं किन्तु भा.ज.पा. सरकार हमेषा उनको धोखा ही दिया । लगातार पिछले दो सालों में गन्ने के मूल्य में कोई वृृद्धि नहीं हुई है।  अगैती में 325 रु., सामान्य में 315 रु. तथा अन्य में 310 रुपये जो एस.ए.पी. लागू की गयी थी उसमें केाई बढ़ोत्तरी नहीं की गयी ।
नेता, कांगे्रस विधान मण्डल दल ने कहा है कि बिजली के दाम बढ़ये गये, उर्वरक के दाम बढ़े, डीजल- पेट्रोल महंगा हुआ, कीटनाषक दवाओं के दाम बढ़े, सिंचाई, निराई- गुड़ाई,  मजदूरी बढ़ी- किन्तु गन्ने के मूल्य में कोई वृृद्धि नहीं की गयी जबकि गन्ना उत्पादन की लागत काफी बढ़ गयी है जिसका सीधा असर गन्ना किसानों पर पड़ रहा है, गन्ने के मूल्य न बढ़ाये जाने से इसके किसानों को भारी नुकसान होगा और उनके सामने विषम परिस्थ्तिि उत्पन्न हो जायेगी ।
गन्ना प्रदेष में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की नकदी फसल (ब्ंेी ब्तवचद्ध है, और प्रदेष के लगीाग 40 जिलों में गन्ने की खेती होती है, तथा लगभग 50 लाख किसान गन्ने की फसल पैदा करते हैं, इन किसानों के परिवार के लगभग 2.50 करोड़ लोग जुड़े है, जो सरकार की गलत नीतियों के कारण सीधे प्रभावित होते हैं ।
नेता, कांगे्रस विधान मण्डल दल ने कहा है कि गन्ना किसान जब अपनी सही मांगों को लेकर आन्दोलन करते हैं तो उन पर दमनात्मक कार्यवाही की जाती है और पुलिस द्वारा उन पर बर्बरतापूर्वक लाठियांॅ बरसायी जाती है, उनको गिरफ्तार करके जेल भेजा जा रहा है, और उनकी आवाज को दबाया जाता है ।
नेता, कांगे्रस विधान मण्डल दल ने कहा है कि कांगे्रस पार्टी गन्ना किसानों के उत्पीड़न की कठोर शब्दों में निन्दा करती है और भा.ज.पा. सरकार से मांग करती है कि पुनर्विचार करते हुये गन्ने का मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल किया जाय, और लागत में 50 प्रतिषत समर्थन मूल्य तय किये जायं, तथा गन्ना किसानों की अन्य मांगों को पूरा किया जाय ।