व्यापारियों एवं उद्यमियों की किसी भी प्रकार की समस्या पर तत्काल कार्यवाही - मनीश कुमार गुप्ता

वेबवार्ता/अजय कुमार वर्मा 
लखनऊ। उत्तर प्रदेश व्यापारी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष मनीश कुमार गुप्ता ने आज जवाहर भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में प्रेसवार्ता आयोजित की। इस अवसर पर श्री गुप्ता ने प्रेस प्रतिनिधियों को यह जानकारी दी। सभी लाइसेंसिंग विभागों का एक साथ जिला स्तर पर कार्यशाला आयोजित की जायगी एवं कैम्प लगाया जायेगा। उत्तर प्रदेश में व्यापारियों एवं उद्यमियों की किसी भी प्रकार की समस्या, शोषण, उत्पीड़न की दशा में तत्काल कार्यवाही की जायेगी। कृषि उत्पादन मण्डी परिषद में मण्डी परिषद में पंजीकृत व्यापारियों की किसी दुर्घटना आगजनी आदि की स्थिति में उनको एवं उनके परिवार को आर्थिक सहायता दिये जाने का प्राविधान किया जाना चाहिये।
      श्री गुप्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पूर्ववर्ती सरकारों के पूर्वाग्रह एवं गलत नीतियों के कारण हजारों की संख्या में छोटी-बड़ी फैक्ट्रियाॅं बंद पड़ी हैं, जिनको उद्यमी प्रदेश सरकार की सुरक्षा एवं सहयोगी नीति से प्रभावित होकर पुनः चालू करना चाहते हैं, परन्तु पुरानी फैक्ट्री को दुबारा शुरू करने पर विद्युत भार चार्ज दुबारा लिया जा रहा है, जबकि उनमें ट्रान्सफार्मर, खम्बे, केबिल इत्यादि का चार्ज प्रथम बार उद्योग की स्थापना के समय ही ले लिया जाता है और उसी को दोबारा चालू करना होता। इसीलिये यह दोहरी व्यवस्था उद्योगों को पुनर्जीवित करने में बाधक सिद्ध हो रही है, इसलिये बंद पड़ी इकाईयों को पुनः चालू किये जाने पर उन पर दोबारा विद्युत भार चार्ज समाप्त किया जाना, जिससे उत्तर प्रदेश में बंद पड़ी अधिक-से-अधिक इकाईंयाॅं चालू हो सकें और प्रदेश का विकास हो सके, जिसके क्रियान्वयन के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं।
      उपाध्यक्ष व्यापारी कल्याण बोर्ड ने कहा कि व्यापारियों के कर निर्धारण के सम्बन्ध में अधिकारियों के विवेक द्वारा कोई निर्णय लिये जाने से व्यापारियों का अनावश्यक शोषण एवं उत्पीड़न होता है एवं उनका व्यापार भी प्रभावित होता है, जबकि जी0एस0टी0 की नई व्यवस्था में विवेक के आधार पर कोई भी निर्णय लिये जाने का कोई भी प्राविधान नहीं है। ऐसी परिस्थिति में पुराने मामलों में ऐसा किया जाना उचित नहीं है। मा0 मुख्यमंत्री जी द्वारा अपने भाषण में भी यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि विवेक के आधार पर निर्णय लिये जाने के अधिकार की आड़ में व्यापारियों एवं उद्यमियों का शोषण किये जाने की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त की जायेगी। अतः यह व्यवस्था पूरी तरह से समाप्त की जानी चाहिये एवं ऐसे मामलों में यदि अधिकारियों का दोष पाया जाता है तो प्रतिपूर्ति उनके वेतन से किया जाना सुनिश्चित किया जाये। सिर्फ और सिर्फ तथ्यों के आधार पर ही निर्णय लिये जाने का अधिकार दिया गया है।