नये साल पर लिया नया संकल्प 'प्रसाद में पौधा अभियान' : जिलाधिकारी, बांंदा


- जिलाधिकारी, बाँदा की अनूठी पहल : प्रसाद में चढेगा भी पौधा और पुजारी से मिलेगा भी पौधा।
विवेक वर्मा
बांदा। विकास के नवीन पथो के चलते लगातार हो रहे प्रकृति के दोहन के कारण उत्पन्न बढ़ते-गिरते तापमान, वर्षा की कमी आदि के दुष्परिणाम सभी को भुगतने पड़ रहे है। इन्हीं सब से आहत होकर प्रदेश के बाँदा जिले के जिलाधिकारी हीरालाल ने नये वर्ष पर संकल्प के रूप मे एक अनूठी पहल करते हुये वृक्षारोपण ही नहीं बल्कि ''वृक्ष जियाओ अभियान'' को जन्म दिया। इसके अंतर्गत रोपे गये उस पौधे को बचाने और उसे बड़ा करने के अभियान के लिये उन्होंने मंदिरों को जोड़ा।



वह स्वयं मंदिरों में जाकर एक-एक पुजारी से मिले और उन्हें तथा मंदिर आने वाले भक्तों को इस बात के लिए तैयार किया कि प्रसाद के रूप में वो मंदिरों में फूल, माला, नारियल, लड्डू के साथ एक पौधा भी चढ़ाएं और बाद में उन्हीं पौधों को पुजारी प्रसाद के साथ भक्तों को दें।
जब कोई पौधा प्रसाद रूप में मिलेगा तो कोई उसका अनादर नहीं करेगा, उसे इधर-उधर फेंकेगा नहीं ये सोचकर कि ऐसा करना प्रसाद का अपमान करना है और उस पौधे रुपी प्रसाद को जब कहीं लगायेगा तो उसकी देखभाल भी करेगा और उसका सम्मान भी करेगा। इस अनूठी पहल को मंदिर के पुजारियों ने आगे आकर सहर्ष किया है।
बाँदा के जिलाधिकारी ने विकास का एक नया पथ चुना है जो उस शाश्वत भारतीय दर्शन का मूर्त रूप है जो कहती है कि एक वृक्ष लगाओ तो कई पीढ़ियाँ तर जाती है, जो कहती है कि वृक्ष का पालन-पोषण उस तरह करो जैसा एक पिता अपने पुत्र की करता है। बुन्देलखण्ड देश के पिछड़े हिस्सों में गिना जाता है और ऐसे इलाके के रूप में चिन्हित हैं। जहाँ गर्मी में तापमान 48 डिग्री तक पहुँच जाती है और बारिश का औसत हरेक वर्ष घटता ही चला जा रहा है। ऐसे में वृक्षों को जियाने का जिलाधिकारी का अभियान ''भागीरथ प्रयास'' है जिसे सारे देश को मॉडल रूप में स्वीकार करना चाहिए।
प्रकृति को माँ रूप में देखने की दृष्टि देने और हरेक व्यक्ति को पर्यावरण मित्र रूप में तैयार करने के जिस अभियान को जिलाधिकारी, बाँदा चला रहे हैं। यकीन जानिये अगर इस काम को मिलकर अगर सारे देश ने करना शुरू दिया तो सब कुछ ठीक हो जायेगा। हीरालाल ने महसूस किया कि मंदिर में चढ़ाये गये या मंदिर से मिला हुआ प्रसाद को सब पवित्र मानते हैं, इतना पवित्र कि अगर वो जमीन पर गिर जाये तो भी लोग उसे प्रणाम कर सर से लगाते हुए ग्रहण करते हैं, कोई कभी प्रसाद को फेंकता नहीं है, कभी कोई उसका अनादर नहीं करता है।