माध्यमिक शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाकर देश और दुनिया में विशिष्ट स्थान दिलाने का प्रयास किया गया - डा0 दिनेश शर्मा

वेबवार्ता(न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा 
लखनऊ 30 दिसंबर। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग की कमान संभाल रहे डा0 दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाकर यूपी की शिक्षा व्यवस्था को देश और दुनिया में विशिष्ट स्थान दिलाने का प्रयास किया गया है।  आज उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में लाए गए बदलाव देश और दुनिया में चर्चा का विषय बन रहे हैं। 
डा. दिनेश शर्मा ने आज यहां अपने कार्यालय कक्ष में यह जानकारी देते हुए बताया कि सरकार को खस्ताहाल शिक्षा व्यवस्था विरासत में मिली थी  पर हमने विरासत में मिली जर्जर व्यवस्था को  देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में समग्रता में सुधारने का निश्चय किया। हमारा लक्ष्य शिक्षा व्यवस्था को नए स्वरूप में  गढने का था, जिससे कि भारत को फिर से  विश्व गुरु बनाने के सपने को साकार किया जा सके। शिक्षा व्यवस्था में  समग्र सुधार के लिए चार लक्ष्य निर्धारित किए गए जिनमें सुखी मन शिक्षक,  तनावमुक्त विद्यार्थी, गुणवत्तापरक  शिक्षा तथा नकल विहीन परीक्षा शामिल है। इन  आधारभूत मंत्रों पर पिछले ढाई वर्ष से अधिक समय के दौरान हुए कार्यों ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन ला दिया है। 
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया के सपने को साकार करने की मजबूत नींव रख दी है। शिक्षार्थियों को ज्ञानवान बनाने के साथ ही हुनरमंद बनाने का भी  इंतजाम किया है। सरकार बेरोजगारों की फौज नहीं बल्कि युवाओं को काबिल और हुनरमंद बनाने की ओर बढ़ चली है। उन्होंने बताया कि बदलावों के  लिए तकनीक का उपयोग किया गया है जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सरकार ने प्रयागराज बोर्ड के परीक्षा केन्द्र निर्धारण, मान्यता, पंजीकरण  तथा डुप्लीकेट अंक पत्र   आदि कार्यों  में सुधार के  लिए आनलाइन व्यवस्थाए लागू की हैं। 
उन्होंने कहा कि परीक्षाओं के समय में कमी की गई है तथा  दो माह से अधिक चलने वाली परीक्षाए आज मात्र 14 और 15  दिनो में कराई जा रही है। परीक्षा केन्द्रों के निर्धारण की प्रक्रिया में बदलाव से परीक्षा केन्द्रों की संख्या में भी कमी आई है। वर्ष 2017 में 11414 परीक्षा केन्द्र बनाए गए थे जबकि आनलाइन परीक्षा केन्द्र निर्धारण की व्यवस्था के बाद  वर्ष  2020 में यह संख्या मात्र 7786 ही रह गई है। इससे परीक्षा पर होने वाले व्यय को कम किया गया है। नकल विहीन  परीक्षा के लिए परीक्षा केन्द्रों पर सीसीटीवी कैमरे तथा वायस रिकार्डर तथा राउटर  की व्यवस्था अनिवार्य की गई जिससे कि परीक्षा में शुचिता बन सके। इस बार से केन्द्रीय कन्ट्रोल रूम भी बनाया जाएगा जिससे एक स्थान से ही परीक्षा की मानीटरिंग की जा सके। परीक्षाओं में कापी बदलने जैसे प्रवृत्ति पर रोक के लिए कापियों पर कोडिंग की व्यवस्था की गई है। 
उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 से परीक्षा के प्रारूप में बदलाव करते हुए दो प्रश्न पत्र के स्थान पर एक प्रश्न पत्र की प्रणाली लागू की गई है। छात्रों व शिक्षकों की सुविधा के लिए सत्र के आरंभ से ही  शैक्षिक पंचाग की व्यवस्था लागू की गई है। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए परीक्षा की तिथि की घोषणा सत्र आरंभ होने के साथ ही कर दी गई है। पिछली सरकारों में प्रचलित नकल सरीखी व्यवस्थाओं पर लगाम लगाने तथा कक्षा 9 व 11 के लिए आधार लिंक पंजीकरण कराने से बाहरी प्रदेशों से व्यक्तिगत परीक्षा के लिए पंजीकरण कराने वालों की संख्या में भारी कमी आई है। वर्ष 2017 में यह संख्या 150209 थी जो अब मात्र 6595 ही रह गई है। नकल रोकने के उपायों के चलते नकल के प्रकरणों में भी कमी आई है। वर्ष 2018 में नकल के 3233 प्रकरण प्रकाश में आए थे जबकि 2019 में 1182 प्रकरण ही सामने आए है। नकल विहीन परीक्षा ने उस यूपी की पहचाने को बदल दिया है जो कभी नकल के लिए कुख्यात हुआ करता था । 
डा. शर्मा ने बताया कि यूपी बोर्ड के छात्र अन्य बोर्ड के छात्रों के साथ बेहतर तरीके से  प्रतिस्पर्धा कर सकंे इसके लिए पाठ्यक्रम  में बदलाव करने के साथ ही एनसीआरटी पैटर्न को लागू किया गया, जिससे प्रदेश भर में शिक्षा में एकरूपता आ सके। यह पुस्तकें यूपी में 60 प्रतिशत कम मूल्य पर उपलब्ध है। सरकार ने छात्रों को हुनरमंद बनाने के लिए कौशल विकास को माध्यमिक शिक्षा से जोडा है। इसके लिए व्यवसायिक शिक्षा के अन्तर्गत  आटोमाबाइल, रिटेल, सिक्योरिटी व आईटी को माध्यमिक शिक्षा में जोडा गया है। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में राजकीय, सहायता प्राप्त तथा वित्तविहीन विद्यालयों के माध्यम से कक्षा 9 से लेकर कक्षा 12 तक कुल 109.81 लाख विद्यार्थियों के पठन पाठन की व्यवस्था की जा रही है। सरकार ने शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए अवकाश कम किए हैं जिससे कि शिक्षण कार्य के लिए अधिक समय मिल सके। 
डा. शर्मा ने बताया कि यूपी में निजी स्कूलों में होने वाली मनमानी फीस वृद्धि पर लगाम के लिए सरकार ने कानून बनाया है जिस पर न्यायालय नें भी सकारात्मक टिप्पणी थी। अब निजी स्कूल मनमाने तरह से फीस नहीं बढा सकेंगे। इसके अलाव शिक्षकों के सेवानिवृत्त के दिन ही उनके देयों के भुगतान की व्यवस्था की गई है।- अभिषेक सिंह