गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए प्रदेश सरकार कृतसंकल्पित- डाॅ0 दिनेश शर्मा


- प्रदेश सरकार एवं सी0आई0आई0 के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय 'स्कूल समिट' का शुभारम्भ
- शिक्षा केवल शिक्षित ही नहीं अपितु संस्कारित बनाते हुए समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध कराती है
- समाज के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के विद्यार्थियों को बिना किसी भेदभाव के निःशुल्क एवं शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े इन्वेस्टमेंट के बिना टिकाऊ एवं स्थाई विकास नहीं किया जा सकता है-डाॅ0 सतीश चन्द्र द्विवेदी
वेबवार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा 
लखनऊ 11 दिसम्बर। शिक्षा निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है यह केवल शिक्षित ही नहीं अपितु संस्कारित भी करती है तथा समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध कराती है। शिक्षक के लिए समान अवसरों को उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता के फलस्वरुप माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ने माध्यमिक शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन किए हैं।



प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने आज यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सीआईआई (कन्फेडरेशन आॅफ इंडियन इंडस्ट्री) और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय 'स्कूल समिट' के उद्घाटन सत्र के अपने उद्बोधन में यह विचार व्यक्त किये।डॉ दिनेश शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तनावमुक्त विद्यार्थी, सुखी मन शिक्षक तथा नकल विहीन परीक्षा के संकल्प तथा स्वच्छता, पारदर्शिता एवं सुशासन की सतत गतिमान प्रक्रिया के आलोक में शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु प्रदेश सरकार ने अनेक निर्णय लिए हैं। प्रदेश सरकार ने पाठ्यक्रम में एकरूपता लाने के लिए शैक्षिक सत्र 2018-19 से एनसीईआरटी की तर्ज पर पाठ्यक्रम लागू किया। डॉ शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक पक्ष के विकास के साथ-साथ व्यक्तित्व एवं कौशल विकास हेतु व्यवसायिक शिक्षण की व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता थी। परम्परागत टेªंड वर्तमान समय में अधिक प्रासंगिक नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि प्रादेशिक आवश्यकताओं को देखते हुए ऑटोमोबाइल, रिटेल, सिक्योरिटी एवं आईटी को माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश इलाहाबाद के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याओं व शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु निदेशालय स्तर पर पृथक ईमेल बवउचसंपदकमेमबमकन/हउंपसण्बवउ पर पंजीकरण  कराकर प्राप्त प्रकरणों का अभियान चलाकर निस्तारण किया जा रहा है। उच्च शिक्षा माध्यमिक शिक्षा परिषद तथा बेसिक शिक्षा परिषद के सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों तथा कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों के त्वरित निस्तारण उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा अधिकरण का गठन किया गया है। इसी प्रकार ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों का पारदर्शी तरीके से स्थानांतरण की व्यवस्था भी की गई है।डॉ शर्मा ने कहा कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के विद्यार्थियों को बिना किसी भेदभाव के निशुल्क एवं गुणवत्ता परक शिक्षा देने के लिए कृतसंकल्प सरकार द्वारा शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े विकास खंडों में 149 दीनदयाल राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज, अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में 37 राजकीय इंटर कॉलेज सहित कुल 194 नवीन माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना की गई है तथा उनके संचालन हेतु शिक्षक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के   5162 पदों का सृजन किया गया। स्वतंत्रता के पश्चात जिन राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान एवं गणित शिक्षण की व्यवस्था नहीं थी, उनमें एक अप्रैल 2018 से गणित एवं विज्ञान वर्ग के शिक्षण की व्यवस्था हेतु कुल 695 पदों का सृजन करके शिक्षण की व्यवस्था की गई। इसी प्रकार जनपद मुख्यालय के 130 माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षण हेतु पद सृजन की व्यवस्था भी की गई। जन सामान्य की सुविधा के लिए प्रदेश के निजी विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों से ली जाने वाली फीस को नियमित करने के लिए उत्तर प्रदेश वित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2018 लागू किया गया है। डाॅ0 दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों में नकल की टेण्डर व्यवस्था जैसी अवधारणा को वर्तमान सरकार ने समाप्त करते हुए नकलविहीन, स्वच्छ एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था को लागू किया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को विद्यालयों में अधिक अध्ययन दिवस मिले, इसमें सुधार करते हुए 220 दिन का अध्ययन-अध्यापन दिवस अनिवार्य किया गया है। इससे समय से पाठ्यक्रम को पूरा कराकर विद्यार्थियों को नकलविहीन परीक्षा हेतु प्रेरित किया जा सकेगा। प्रदेश सरकार द्वारा पारदर्शी व्यवस्था लागू करते हुए शिक्षा के व्यवसायीकरण को पूरी तरह से रोकते हुए शिक्षा माफियाओं पर पूर्ण अंकुश लगाया गया है।


      प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाॅ0 सतीश चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि कायाकल्प योजना के माध्यम से वर्तमान सरकार द्वारा प्रदेश के स्कूलों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। प्रदेश के 15 हजार स्कूलों को इंग्लिश मीडियम के स्कूलों में तब्दील किया गया जबकि 3 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास भी प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देशन में वर्तमान प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था पर फोकस करते हुए शिक्षा क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट बढ़ाने के सार्थक प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े इन्वेस्टमेंट के बिना टिकाऊ एवं स्थाई विकास नहीं किया जा सकता है। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री छत्तीसगढ़ सरकार श्री प्रेमसाई सिंह टीकम ने शिक्षा व्यवस्था के विभिन्न बिंदुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न नवाचारों के बारे में भी जानकारी दी।  इस अवसर पर राज्य मंत्री माध्यमिक शिक्षा श्रीमती गुलाब देवी, प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा श्रीमती आराधना शुक्ला, सचिव बेसिक शिक्षा श्रीमती मनीषा त्रिघाटिया, निदेशक बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं सीआईआई के प्रतिनिधि, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा के जनपदीय अधिकारी एवं शिक्षक तथा विद्यार्थी उपस्थित थे। -जयेन्द्र सिंह